एस एस बी टीम ने कार्रवाई करते हुए नेपाल से तस्करी की नीयत से भारत लाई जा रही 07 नेपाली युवतियों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया, साथ ही 02 मानव तस्करों को भारतीय सीमा में घुसपैठ के दौरान बॉर्डर पीलर संख्या 90 से करीब 150 मीटर अंदर से गिरफ्तार किया।
मुक्त कराई गई युवतियाँ नेपाल के संखुवासभा जिले की रहने वाली हैं, जिनकी उम्र 16 से 21 वर्ष के बीच है। तस्करों की पहचान जापान गुरुंग (61) और दीपेश गुरुंग (41) के रूप में हुई है, जो नेपाल और भारत दोनों में सक्रिय थे। जांच में सामने आया कि युवतियों को हांगकांग और अन्य देशों में नौकरी के नाम पर तस्करी के लिए भेजा जाना था।
इसके लिए पहले उन्हें भारतीय पते पर फर्जी आधार, पैन और वोटर कार्ड बनवाकर पासपोर्ट दिलाया जाता था। जापान गुरुंग, जिसे गांव में 'दादा' के नाम से जाना जाता है, लड़कियों के माता-पिता को बहला-फुसलाकर उनसे 1 से 1.5 लाख नेपाली रुपये तक वसूलता था।
उसने यह भी स्वीकार किया कि उसका बेटा हांगकांग में इस तस्करी नेटवर्क को संभालता है। दीपेश गुरुंग एक टैक्सी ड्राइवर है, जिसका काम लड़कियों को सीमा पार कराकर सिलीगुड़ी तक पहुंचाना था। वह पिछले 2–3 वर्षों से इस रैकेट का हिस्सा रहा है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि तस्कर लड़कियों के उपनाम 'गुरुंग' जबरन परिवर्तन करवा कर फर्जी दस्तावेज बनवाते थे, ताकि उन्हें भारत से पासपोर्ट दिलवाकर विदेश भेजा जा सके।
साथ ही, दस्तावेज़ बनाने में रतन बर्मन, रोहित गुरुंग और रमन बर्मन जैसे अन्य लोग भी शामिल थे, जिनके लिंक असम, सिलीगुड़ी और नेपाल से जुड़े हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, सभी युवतियों और दोनों तस्करों को खोरीबाड़ी पुलिस स्टेशन सौंप दिया गया है, जहाँ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
