जानकारी के अनुसार, त्जोल इवान का वीजा 21 जुलाई 2024, त्सोवेमोहो क्लाउड इद्रिस का 18 अप्रैल 2025 और बोन्हा ए. न्याम श्लवेन का वीजा 7 नवंबर 2024 तक वैध था। तीनों विदेशी नागरिकों के वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद तीनों सिलीगुड़ी क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे थे।
एसएसबी ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए तीनों विदेशी नागरिकों को पानीघाटा पुलिस को सौंप दिया। बताया जा रहा है कि ये तीनों नागरिक स्थानीय इलाके में किराए के मकान में रहकर फुटबॉल खेलते थे और इसी के जरिए जीवन यापन कर रहे थे।
अब तक भारत-नेपाल सीमा पर ज्यादातर मामलों में बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी सामने आती रही है, लेकिन इस बार अफ्रीकी मूल के तीन नागरिकों की गिरफ्तारी से सीमा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
स्थानीय लोगों के मन में यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ये तीनों यहां किस मकसद से आए थे? क्या इनका कोई आपराधिक उद्देश्य था? अगर ऐसा नहीं था, तो वीजा की वैधता खत्म होने के बावजूद इन्होंने अपने देश वापसी की कोशिश क्यों नहीं की? क्या ये गिरफ्तारी के डर से छिपे हुए थे?
हालांकि एसएसबी सूत्रों के अनुसार, तीनों नागरिक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी हैं और वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी पानीघाटा क्षेत्र में रहकर फुटबॉल खेलकर गुजर-बसर कर रहे थे। रविवार को एसएसबी ने विशेष अभियान के तहत उन्हें हिरासत में लिया और आगे की जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया है।
