कार्यक्रम का शुभारंभ 41वीं वाहिनी के कमांडेंट श्री विकास कुमार ने किया। उन्होंने उपस्थित नागरिकों एवं वाहिनी के कार्मिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पाँच वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को पल्स पोलियो की अतिरिक्त दो बूंदें अवश्य पिलानी चाहिए, ताकि भारत का पोलियो-मुक्त दर्जा भविष्य में भी सुरक्षित बना रहे। उन्होंने सभी से इस महत्वपूर्ण संदेश को जन-जन तक पहुँचाने और बच्चों के स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया।
यह टीकाकरण शिविर वाहिनी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं कमांडेंट (चिकित्सा) डॉ. संजय चौधरी के मार्गदर्शन और निगरानी में संपन्न हुआ। इस दौरान वाहिनी चिकित्सालय के पैरामेडिकल स्टाफ एवं मेडिक्स ने पाँच वर्ष तक की आयु के बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में 41वीं वाहिनी के कमांडेंट श्री विकास कुमार, कमांडेंट (चिकित्सा) डॉ. संजय चौधरी, उप-कमांडेंट (दंडपाल) श्री केतन कैलास सालुंके सहित अन्य अधिकारीगण, अधीनस्थ अधिकारी, वाहिनी के कार्मिक तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
स्थानीय ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने सशस्त्र सीमा बल की इस जनकल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए इसे समाजहित में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम न केवल बच्चों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं।
41वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, रानीडंगा का यह प्रयास राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्यों को मजबूत करने के साथ-साथ समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और जनसेवा के संकल्प को भी दर्शाता है। यह शिविर बच्चों को पोलियो-मुक्त भविष्य प्रदान करने और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
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