अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा सोमवार दोपहर समरदुंग-मामरिंग सुरंग निर्माण स्थल पर हुआ। सुरंग के अंदर अचानक भूस्खलन होने से रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और दर्जनों मजदूर अंदर फंस गए। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब सुरंग में मीथेन गैस की उच्च मात्रा होने की आशंका जताई गई, जिससे बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय सुरंग के भीतर 25 से 27 मजदूर मौजूद थे। इनमें से कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अब तक 10 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं, सुरंग में अब भी कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। हालांकि, अंदर मौजूद लोगों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिक्किम पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस, तथा विशेष माइनिंग रेस्क्यू टीमों को मौके पर तैनात किया गया है। ऑक्सीजन सपोर्ट और विशेष सुरक्षा उपकरणों से लैस बचावकर्मी अत्यंत जोखिम भरे हालात में सुरंग के भीतर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
सिक्किम के मुख्यमंत्री स्वयं पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, NHPC और परियोजना प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं। केंद्र सरकार ने भी राज्य प्रशासन को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है ताकि राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाई जा सके।
हादसे के कारणों की जांच जारी है। शुरुआती आशंका है कि सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव या गैस विस्फोट भूस्खलन की वजह बन सकता है, हालांकि अधिकारियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में चल रही बड़ी आधारभूत परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा, भूगर्भीय जोखिम और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लापता मजदूरों का पता नहीं चल जाता, तब तक राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा।
